7/21/2014

कितने दिन में अनुष्ठान पूरा करना है?


जप की संख्या :
अपने इष्टमंत्र या गुरुमंत्र में जितने अक्षर हों उतने लाख मंत्रजप करने से उस मंत्र का अनुष्ठान पूरा होता है | मंत्रजप हो जाने के बाद उसका दशांश संख्या में हवन, हवन का दशांश तर्पण, तर्पण का दशांश मार्जन और मार्जन का दशांश ब्रह्मभोज कराना होता है | यदि हवन, तर्पणादि करने का सामर्थ्य या अनुकूलता न हो तो हवन, तर्पणादि के बदले उतनी संख्या में अधिक जप करने से भी काम चलता है | उदाहणार्थ: यदि एक अक्षर का मंत्र हो तो 100000 + 10000 + 1000 + 100 + 10 = 1,11,110 मंत्रजप करने सेसब विधियाँ पूरी मानी जाती हैं |

अनुष्ठान के प्रारम्भ में ही जप की संख्या का निर्धारण कर लेना चाहिए। फिर प्रतिदिन नियत स्थान पर बैठकर निश्चित समय में, निश्चित संख्या में जप करना चाहिए।
अपने मंत्र के अक्षरों की संख्या के आधार पर निम्नांकित तालिका के अनुसार अपने जप की संख्या निर्धारित करके रोज निश्चित संख्या में ही माला करो। कभी कम, कभी ज़्यादा......... ऐसा नहीं।
सुविधा के लिए यहाँ एक अक्षर के मंत्र से लेकर सात अक्षर के मंत्र की नियत दिनों में कितनी मालाएँ की जानी चाहिए, उसकी तालिका यहाँ दी जा रही हैः

 
अनुष्ठान हेतु प्रतिदिन की माला की संख्या

कितने दिन में अनुष्ठान पूरा करना है?
मंत्र के अक्षर
दिन में
दिन में
11 दिन में
15 दिन में
21 दिन में
40 दिन में
एक अक्षर का मंत्र
150 माला
115 माला
95 माला
70 माला
50 माला
30 माला
दो अक्षर का मंत्र
300 माला
230 माला
190 माला
140 माला
100 माला
60 माला
तीन अक्षर का मंत्र
450 माला
384 माला
285 माला
210 माला
150 माला
90 माला
चार अक्षर का मंत्र
600 माला
460 माला
380 माला
280 माला
200 माला
120 माला
पाँच अक्षर का मंत्र
750 माला
575 माला
475 माला
350 माला
250 माला
150 माला
छः अक्षर का मंत्र
900 माला
690 माला
570 माला
420 माला
300 माला
180 माला
सात अक्षर का मंत्र
1050 माला
805 माला
665 माला
490 माला
350 माला
210 माला


जप करने की संख्या चावल, मूँग आदि के दानों से अथवा कंकड़-पत्थरों से नहीं बल्कि माला से गिननी चाहिए। चावल आदि से संख्या गिनने पर जप का फल इन्द्र ले लेते हैं।
मंत्र संख्या का निर्धारणः कई लोग ‘ॐ’ को ‘ओम’ के रूप में दो अक्षर मान लेते हैं और नमः को नमह के रूप में तीन अक्षर मान लेते हैं। वास्तव में ऐसा नहीं है। ‘ॐ’ एक अक्षर का है और ‘नमः’ दो अक्षर का है। इसी प्रकार कई लोग ‘ॐ हरि’ या ‘ॐ राम’ को केवल दो अक्षर मानते हैं जबकि ‘ॐ... ह... रि...’ इस प्रकार तीन अक्षर होते हैं। ऐसा ही ‘ॐ राम’ संदर्भ में भी समझना चाहिए। इस प्रकार संख्या-निर्धारण में सावधानी रखनी चाहिए।
  

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